Women oppression and Indian society

नारी उत्पीड़न और भारतीय समाज (Women oppression and Indian society)

Women oppression and Indian society

भारत एक प्राचीन राष्ट्र है उसकी सभ्यता और संस्कृति भी अत्यधिक प्रचलित है प्राचीन भारतीय परंपरा में नारी को एक और देवी मानकर उसकी पूजा की गई वही उसे दासी बनाकर पुरुष के अधीन रखने का प्रयास भी किया गया विश्व के प्रथम कानून बेत्ता मनु महाराज ने अपनी मनुस्मृति में एक और यह कहा कि जहां नारियों की पूजा होती है वहां पर देवताओं का विनाश होता है वहीं दूसरी ओर लिखा किनारी बचपन में पिता के अधीन योग में पति के अधीन और वृद्धावस्था में बेटे के अधीन रहती है एक और भारतीय परंपरा में नारी को ज्ञान की देवी सरस्वती धन-दौलत और समृद्धि की देवी लक्ष्मी तथा शक्ति की प्रतीक दुर्गा के रूप में पूजा गया दूसरी ओर सीता को अग्नि परीक्षा और गर्भावस्था मैं घर से निष्कासन का दंड मिला द्रोपदी ने बरा अर्जुन को परंतु पांचों पांडवों की पत्नी बंद करो से रहना पड़ा और एक साधारण वस्तु की तरह उसे जुड़ें मैं दाव पर लगा दिया गया हमारी परंपरा में गार्गी मैत्री लोपामुद्रा लीलावती जैसी नारियों का उल्लेख है जो विद्वान थी और ऋषि के साथयो बैठकर धर्म चर्चा कर सकती थी दूसरी और नारियों को शिक्षा से वंचित रख कर घर की चारदीवारी में बंद रखने के उदाहरण भी मिल जाएंगे हमारी परंपरा में नारी को या तो देवी मानकर पूजा के योग्य घोषित किया गया या फिर उदासी बनाकर बस तू समझ कर उसका क्रय विक्रय किया गया नारी को मानवीय समझ कर जीने का अधिकार कम ही दिया गया नारी से अपेक्षा की गई कि वह पुरुष के लिए मंत्री दासी माता रमणीय रंभा धर्म अनुकूल होने के साथ-साथ पृथ्वी की तरह क्षमाशील बने परंतु इसके बदले में पुरुष उसे क्या दें यह स्पष्ट नहीं किया गया नारी उत्पीड़न की शुरुआत यहीं से होती है


नारी उत्पीड़न का अर्थ है नारी को मानव चित्र अधिकारों से वंचित करना उसे व्यक्ति नहीं बस तू समझ ना उस की अपेक्षा अवहेलना तथा शोषण करना यह एक कटु सत्य है कि भारतीय समाज में नारी ही नारी के उत्पीड़न को बढ़ावा देती है मां के रूप में उसकी ममता बेटी से अधिक बेटों पर मरती है अच्छे खिलौने अच्छा भोजन अच्छी शिक्षा सभी पर पहला अधिकार बेटे का रहता है परिवार में लड़की में हीनता का भाग जन्म से ही भरा जाने लगता है और इसके लिए माताओं की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण है


भारतीय समाज में नारी घर के सारे काम करती है उसके काम को महत्व नहीं दिया जाता यदि किसी गृहस्थ नारी से पूछा जाए कि वह क्या करती है तो कुछ नहीं घर पर रहती हूं नौकरी ना करने वाली महिलाएं घर के काम को कुछ ही मानने लगती है जबकि उस काम का मूल्य भावनात्मक दृष्टि से ही नहीं आर्थिक दृष्टि से भी बहुत अधिक होता है भारतीय नारी स्वयं और संकोच को आभूषण मानती है और अपनी इच्छाओं का दमन कर परिवार के लिए पन्ने को होम करती है फिर भी परिवार में उसे उचित आदत ना मिले तो इसे भी नारे का उत्पीड़न  ही कहा जाएगा


नारी उत्पीड़न का नग्न रूप उसका शारीरिक शोषण है सृष्टि को आगे बढ़ाने के लिए वंश वृद्धि के लिए पुरुष और नारी का साथ आना आवश्यक है सभ्य समाज में विवाह को धार्मिक कृत्य माना गया और ओके आप अपनी मिलन की संज्ञा दी गई है भारत  मैं विवाह व्यापार बनते जा रहे हैं पढ़े लिखे पदस्थ और उच्च स्कूलों के दूल्हे भी विवाह की मंडी में बिकते हैं दहेज की आग में कितनी भी ललन नाम का सिंदूर जलकर भस्म हो जाता है कितनी युक्तियां प्रयुक्त पर नहीं पा सकती क्योंकि दहेज का दुर्ग भेजना उनके सामर्थ्य से परे होता है दहेज के लिए बहू के जलने या जलाने की खबरें रोज छपती है सास-ससुर दुल्हनियां और अन्य संबंधी जब किसी अबला को देश के लिए बताते हैं तो अपने को सभ्य समाज का हिस्सा मानने से डर  लगने लगता है  नित्य प्रति बलात्कारों के समाचार छपते हैं सड़कों पर बसों में Today Current Affairs विद्यालयों और कार्यालय में नारी उत्पीड़न के समाचार आम होते जा रहे हैं बूत माही बच्चियों  से लेकर नानी दादी की उम्र की विधाओं के साथ बलात्कार के समाचार पढ़ने को मिल जाते हैं बड़े शहरों में नारी सबसे अधिक असुरक्षित क्यों है शहर तो सभ्यता का पालना कहते हैं तो भारत की राजधानी दिल्ली नारी उत्पीड़न में भारत में एक नंबर पर क्यों है क्या सभ्यता का अर्थ बदल गया है


भारतीय समाज में नारी उत्पीड़न के अनेक कारण है पुरुष प्रधान समाज में पुरुष को हर तरह की आजादी रहती है हमारे संविधान में लिंग भेद मिटा दिया गया है परंतु हमारे मस्तिष्क में पुरुषों की श्रेष्ठता का जो कीड़ा लगा है उससे हम मुक्त नहीं हो पाए दूसरा कारण आज की भौतिक वादी सभ्यता है जिसमें इंद्रिय सुख को ही सब कुछ माना जाता है आधुनिक नारी की इस दौड़ में शामिल है इसलिए शोषण का शिकार भी होती है स्त्री पुरुषों में नसों की आदत है सही है जिससे नारियों के साथ दुर्व्यवहार के अवसर बढ़े हैं धर्मनिरपेक्ष और मूल्य विहीन शिक्षा प्रणाली भी नारी उत्पीड़न को बढ़ावा दे रही है कामकाज नारी को अपने सहकर्मियों और अफसरों तंग किया जाता है जो नारी उत्पीड़न का ही रूप है


नारी उत्पीड़न से मुक्ति नारी शक्ति करण से ही संभव है नारी को भी का भी कानूनी यह आवश्यक है परंतु इसके साथ ही नारी को आर्थिक दृष्टि से आत्मनिर्भर भावनात्मक दृष्टि से मजबूत वैचारिक दृष्टि से सजग और विवेकशील बनाना होगा राजनीतिक दृष्टि से भी नारी जितनी सजग होगी उतनी ही उसका उत्पीड़न कम होगा यदि भारतीय समाज सभ्य समाज बनता है तो नारी उत्पीड़न से उसे मुक्त होना होगा 

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