गांधीजी के विचार (Thoughts of Gandhi ji)

गांधीजी के विचार (Thoughts of Gandhi ji)

Thoughts of Gandhi ji

गांधी एक उच्च कोटि के राजनीतिक थे उन्होंने अपने विचारों संबंधी 1909 ई में गुजराती में हिंद स्वराज नामक पुस्तक लिखी इसमें उन्होंने विभिन्न विषयों जैसे पश्चिमी सभ्यता का त्याग पश्चिमी भारत सभ्यता का समर्थन अहिंसा सत्याग्रह साधन और साध्य रचनात्मक कार्यक्रमों तथा स्वदेशी आदि पर प्रकाश डाला है गांधीजी लिखते हैं कि उनका संपूर्ण प्रयास हिंद स्वराज में वर्णित आदर्शों पर आधारित स्वराज की स्थापना करना है उनके मूलभूत राजनीतिक विचारों का संपर्क वर्णन निम्नलिखित अनुसार हैं State Government Exams


1. अहिंसा - गांधीजी की राजनीतिक विचारधारा का केंद्र बिंदु अहिंसा था वे अहिंसा को मनुष्य जाति का तथा हिंसा को पशु जाति का नियम व मानते थे उनके मतानुसार अहिंसा का अभिप्राय है असीम प्रेम यह सबसे बड़ा नियम है केवल इसी के द्वारा मानव जाति को बचाया जा सकता है अहिंसा वीरों का शुक्र है अहिंसा का पालन करने वाला व्यक्ति तलवार की शक्ति रखता हुआ भी कभी तलवार नहीं उठाता बस इसी को भी मन कर्म और बानी से खाने नहीं पहुंचाना चाहता गांधी जी की दृष्टि में अहिंसा कायरों और कमजोर ओं का अस्त्र नहीं है केवल डर और बहादुर लोग ही इसका उपयोग कर सकते हैं महात्मा गांधी का कथन था कि अहिंसा में समस्त स्इमस्याओं के निराकरण की शक्ति है


2.  सत्याग्रह - गांधी जी ने राजनीति में सत्य ग्रह को प्रमुख स्थान दिए सत्य ग्रह से अभिप्राय है सत्य के लिए आग्रह करना इसे वह आत्मा की शांति या प्रेम शक्ति मानते थे एक आदर्श सत्याग्रही हर उस चीज के सामने झुकने से इनकार करता है जो उसकी दृष्टि में गलत होती है हम सारी उत्तेजना ओं के बीच शांत रहता है बुराई का विरोध करता है पर बुरे से प्रेम करता है वह अपने विरोधी को कभी कष्ट नहीं पहुंचाता वह सदैव कोमल तक द्वारा या तो उसकी बुद्धि को प्रेरित करता है या आत्म बलिदान द्वारा उसके हृदय को सत्याग्रह दोहरा वरदान है यह उसके लिए भी वरदान है जो इसका पालन करता है और इसके लिए भी जिसके विरूद्ध इसका प्रयोग किया जाता है गांधी जी ने सत्याग्रह के लिए 4 शब्दों का होना आवश्यक बताया है यह सकते हैं भ्रम का पालन गरीबी का पालन सत्य का पालन ऐप निर्णय का पालन।


3. स्वदेशी - स्वदेशी गांधीजी का संकेत शब्द था इसकी परिभाषा करते हुए उन्होंने कहा था कि स्वदेशी भा भावना है जो हमें दूर की चीजों को छोड़कर अपने आसपास की चीजों के इस्तेमाल तक सीमित करती है अतः उन्होंने विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार तथा स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने पर बल दिया घरेलू उद्योगों को विकसित करने के उद्देश्य से महात्मा गांधी ने चरखा काटने का संदेश दिया इधर ही भारत में घर-घर में चरखा लोकप्रिय हो गया परिणाम स्वरुप भारतीय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होने की दिशा में आगे बढ़े


4. स्वराज्य - स्वराज्य से गांधी जी का अभिप्राय भारत की इस प्रकार से है जो स्त्री-पुरुष का भेद किए बिना ऐसी बोलिंग जनता के बहुमत से बनी हो जो राज्य को अपना श्रम देते हो गांधीजी के अनुसार स्वराज्य थोड़े से लोगों के जूते ग्रह करने से नहीं आएगा बल्कि राज्य तब होगा तब सभी में इतनी सामर्थ्य आ जाए कि वे सत्ता का दुरुपयोग होने पर सत्ताधारी यों का विरोध कर सकें


5. आदर्श राज्य - गांधीजी भारत में आदर्श राज्य अथवा राम राज्य की स्थापना करना चाहते थे यह पूर्ण तौर से लोकतांत्रिक होगा तथा जिसमें जाति धर्म रंग तथा लिंग आदि के आधार पर किसी से कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा इसमें सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त होंगे इसमें जनता के पास अधिक से अधिक शक्ति होगी तथा राज्य के पास नाम मात्र की ही शक्तियां होगी राज्य ना तो आपकी शक्तियों का दुरुपयोग करेगा तथा ना ही वह नागरिकों के कामों में अनावश्यक हस्तक्षेप करेगा इसमें शक्ति का केंद्रीकरण किया जाएगा गमों का शासन पंचायतों द्वारा चलाया जाएगा राज्य के कर्मचारी इमानदार होंगे कानून नैतिकता पर आधारित होंगे पुलिस लोगों की सेवक होगी संक्षेप में गांधीजी राज्य को जनता की अधिक से अधिक भलाई के लिए एक साधन मात्र बनते थे


6. रचनात्मक कार्यक्रम - गांधीजी ना केवल एक राजनीतिक नेता ही थे बल्कि एक महान समाज सुधारक भी थे उन्होंने स्त्रियों को पुरुषों के समान अधिकार देने पर बल दिया स्त्रियों को शिक्षा देने के समर्थक थे क्योंकि उनका विचार था कि इसके बिना समाज का उत्थान नहीं हो सकता वह बाल विवाह के विरुद्ध थे उन्होंने विधवा पुनर्विवाह के पक्ष में विचार किया उन्होंने छुआछूत का जोरदार विरोध किया वस्तुओं के सेवन के विरुद्ध थे उन्होंने प्रोड शिक्षा तथा हिंदी का पक्ष लिया उन्होंने आजीवन हिंदू मुस्लिम एकता के लिए यत्न किया महात्मा गांधी ने एक बार लिखा


“मैं एक ऐसे भारत के लिए काम करूंगा जिस में गरीब लोग यह महसूस करेंगे कि यह देश उनका है और इसके निर्माण में उनकी आवाज भी प्रभाव कारी है ऐसा भारत जिसमें ऊंची नीची जाति के लोग नहीं होंगे इसमें सभी संप्रदायों के लोग पूर्ण सद्भाव के साथ रहेंगे ऐसे भारत में छुआछूत के अभिशाप की गुंजाइश नहीं होगी स्त्रियां भी पुरुषों के समान अधिकार का प्रयोग करेंगे यह है मेरा सपनों का भारत”


गांधीजी के प्रारंभिक कार्य शिक्षक दिवस 5 सितंबर (Teachers Day


1. चंपारण सत्याग्रह 1917 ई - महात्मा गांधी जी ने भारत में सत्याग्रह का अपना पहला प्रयोग बिहार के सारण जिले में 1918 ईस्वी में किया यहां के यूरोपीय बागान मालिक नील की खेती करने वाले किसानों पर बड़े अमानुष्य अत्याचार करते थे उन्हें अपने खेतों में नील उठाने तथा उपज को सस्ते दामों पर बेचने के लिए विवश किया जाता था किसानों की दिशा की वास्तविक जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से महात्मा गांधी ने स्वस्थ आरएसपी में वहां गए सरकार की धमकियों के बावजूद गांधी जी ने किसानों की शिकायतों की विस्तृत जांच पड़ताल की सरकार को विवश होकर बागान मालिकों के कार्यों की जांच के लिए एक आयोग नियुक्त करना पड़ा महात्मा गांधी जी इसके 1 सदस्य थे इस आयोग की सिफारिशों के परिणाम स्वरुप सरकार ने किसानों के कष्टों को दूर किया यह निसंदेह महात्मा गांधी के प्रथम महान जीत थी


2. अहमदाबाद मिल हड़ताल 1918 ई - 1918 ईस्वी में अहमदाबाद के कपड़ा मिल मजदूरों की वेतन में वृद्धि की मांग के कारण उनमें एक मिल मालिकों में झगड़ा चल रहा था लेकिन मेल मालिक समझौते के लिए तैयार ना हुआ इस परमात्मा गांधी ने झगड़े में हस्तक्षेप किया उन्होंने मिल मजदूरों को अहिंसात्मक हड़ताल करने का सुझाव दिया जो उन्होंने स्वीकार कर लिया महात्मा गांधी ने मजदूरों की मांग का पक्ष लेते हुए आमरण अनशन आरंभ कर दिया चौथे ही दिन मिल मालिक मजदूरों के वेतन में 33% वृद्धि करने के लिए सहमत हो गया


सत्य ग्रह के इन आरंभिक प्रयोगों ने गांधीजी को आम जनता के अत्यंत निकट ला दिया इस प्रकार महात्मा गांधी द्वारा शताब्दियों से सोए हुए भारतीयों मैं एक नई जागृति उत्पन्न करने का कार्य राष्ट्रीय आंदोलन को एक महान देन थी


3. खेड़ा किसान संघर्ष 1918 ई - 1918 ईस्वी में गुजरात के खेड़ा जिले की फसल नष्ट हो गई परिणामस्वरूप वहां के किसानों ने सरकार को लगाम देने से इनकार कर दिया दूसरी ओर सरकार ने लगान की पूरी वसूली करने की जिद पकड़ी गांधी जी ने किसानों को सत्याग्रह करने के लिए संगठित किया अतः किसानों ने 22 मार्च 1918 ईस्वी को सरकार के विरुद्ध सत्याग्रह आंदोलन आरंभ कर दिया इस आंदोलन में सरदार वल्लभभाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई अतः सरकार को झुकने 1 किसानों के समझौता करने के लिए विवश होना पड़ा है इसके अधीन सरकार ने यह मानना कि यह केवल उन किसानों से भू राजस्व एकत्र करेगी जो इसे देने योग्य होंगे निसंदेह यह एक महत्वपूर्ण सफलता थी।

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