State reorganization commission

राज्य पुनर्गठन आयोग (State reorganization commission)

State reorganization commission

आंध्र प्रदेश नामक राज्य के निर्णय की घोषणा के साथ ही भारत के शेष राज्य में भी वृद्धि कर राज्य के निर्माण की मांग उठने लगी थी अतः इस तरह की मांग से छुटकारा पाने और पृथक राज्यों के समर्थन में आरंभ होने वाले आंदोलन को रोकने के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग का निर्माण 1953 में किया गया सरकारी भाषा से संबंधित विवाद से कहीं अधिक दीर्घकालीन और वोट डालने वाली थी इसने केंद्र राज्य संबंध वजह से अधिक महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाया पहला कदम पुराने मद्रास ट्रंप के आंध्र प्रदेश में एक मुख्य आंदोलन के परिणाम से उत्पन्न हुआ इसी कारण राज्यों के पुनर्गठन आयोग को नियुक्त किया गया इस आयोग का मुख्य कार्य राज्यों का पुनर्गठन करते समय स्थानीय स्तर पर बोली जाने वाली भाषाओं को ध्यान में रखते हुए अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करना था इस आयोग ने सम्मान पूर्ण भारत का दौरा किया और स्थानीय स्तर पर बोली जाने वाली भाषाओं का गहन अध्ययन किया कि किसने क्षेत्र में उक्त भाषा बोली जाती है इसी को आधार मानते हुए राज्य पुनर्गठन आयोग ने 1955 में अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार के समक्ष प्रस्तुत की थी इस आयोग ने भाषा के आधार पर 14 राज्य में 6 केंद्र शासित प्रदेशों के गठन की सिफारिशें अपनी रिपोर्ट में की थी इस आयोग की सिफारिशों के आधार पर ही 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम पारित हुआ था जो कि नए नवंबर 1956 को प्रभावित हुआ था इन आयोग की सिफारिशों को कुछ फेरबदल के पश्चात वैसे ही लागू कर दिया गया जैसे कि आयोग ने सिफारिश की थी


नए राज्यों का निर्माण पर मांग यद्यपि भाषा पर आधारित राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर 14 राज्य और 6 केंद्र शासित प्रदेश गठित किए गए थे परंतु इसका यह अर्थ नहीं कि सभी राज्य तत्काल फांसी राज्य में परिवर्तित हो गए थे मुंबई प्रांत एक ऐसा ही प्रांत था जहां गुजराती और मराठी भाषा बोलने वाले लोग रहते थे अतः भाषा के आधार पर इन लोगों ने भी राज्यों के पुनर्गठन की मांग आरंभ कर दी थी धीरे-धीरे यह मांग हिंसक जन आंदोलन में परिवर्तित हो गई थी जब यह हिंसक आंदोलन अधिक भयंकर रूप धारण करने लगा तो 1960 में मुंबई प्रांत के 2 राज्य महाराष्ट्र और गुजरात में विभक्त कर दिया गया था अभी इस माया पुनर्गठन को किए अधिक समय भी नहीं बीता था कि पंजाब प्रांत में हिंदी में पंजाबी भाषा को लेकर दोनों समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए थे पंजाबी भाषा के समर्थक भी लंबे समय से पृथक पंजाबी सुबह राज्य की मांग कर रहे थे परंतु राज्य पुनर्गठन आयोग द्वारा जब उनकी मांग की गई तो इसके पश्चात उन्होंने साठ के दशक में एक जन आंदोलन आरंभ कर दिए यह जन आंदोलन भी शीघ्र ही हिंसक आंदोलन में बंद हो गया था अतः 1 नवंबर 966 को पृथक पंजाबी की मांग के आसपास क्षेत्रों पर हिंदी भाषा हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश में दीपक के 2 राज्य व केंद्र शासित प्रदेश का निर्णय किया गया 1971 में केंद्र शासित प्रदेश को राज्य का दर्जा दिया

Himachal Pradesh Current Affairs in Hindi


1970 में पूर्वोत्तर के राज्यों को पुनर्गठित करके असम राज्य में से गारो खासी जातियां आदिवासी क्षेत्रों को अलग करके पृथक मेघालय राज्य मणिपुर और त्रिपुरा राज्य का निर्माण किया गया तथा अरुणाचल प्रदेश को संघ शासित प्रदेश का दर्जा दिया गया परंतु बाद में 1987 में अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम राज्य का निर्णय किया गया भारत के साथ-साथ सांस्कृतिक और आर्थिक विकास के लक्ष्य को भी ध्यान में रखते हुए सन 2000 में 3 नए राज्य झारखंड छत्तीसगढ़ और उत्तरांचल का गठन किया गया था


वर्तमान समय में अनेकों राज्यों के पुनर्गठन की मांग की जा रही है ताकि आंध्र प्रदेश में तेलंगाना कर्नाटक में कोडवा महाराष्ट्र में विदर्भ गुजरात में कच्छ बिहार में मैथिली राज्य उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल राज्य हरित प्रदेश मध्य प्रदेश में बुंदेलखंड असम में बोडोलैंड जम्मू कश्मीर में डोगरा लैंड आदि प्रमुख है संक्षेप में हम कह सकते हैं कि नेतृत्व में गठित भाषा आधारित राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के पश्चात बंटवारे और अलगाववाद के खतरे में कमी आएगी परंतु ऐसा नहीं हो सकता पिछले 55 वर्ष में भाषा बार राज्य के पुनर्गठन के पश्चात से भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग और अधिक तीव्र होती गई है भाई राज्य तथा अन्य राज्यों के गठन के लिए चले आंदोलन में लोकतांत्रिक राजनीति तथा नेतृत्व की प्रकृति को बुनियादी रूपों में बदला है राजनीति और सत्ता में सहभागिता का मार्ग और अंग्रेजी पढ़े लिखे लोगों के हाथों से निकलकर से स्थानीय भाई लोगों के हाथों में आ चुका है इस राज्य पुनर्गठन आयोग से राज्यों की सीमा निर्धारण का एक आधार हमें प्राप्त हुआ है जैसा कि आशंका थी कि इस आधार पर भारत की एकता और अखंडता खतरे में पड़ सकती है ऐसा ही हुआ बल्कि ऐसी मांगों को स्वीकार करने से देश की एकता और अखंडता और सुधरी हुई है 


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