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हॉकी खेल का इतिहास

इंडियन हॉकी, इंडियन हॉकी टीम, वर्ल्ड हॉकी, हॉकी मैच, हॉकी स्टिक, हॉकी वर्ल्ड कप, हॉकी से जुड़ी पूरी जानकारी हम आपको आज देने वाले हैं तो चलो बिना टाइम वेस्ट करें स्टार्ट करते हैं।

हॉकी ऐसा खेल है जिसका ना तो जन्म स्थान है और ना जन्मदिन कोई नहीं जानता कि पहले पहला हॉकी कब और कहां खेली गई इस बात का प्रमाण है कि प्राचीन पर्शियनो को पेड़ से तराशी गई स्टीक से गेंद का पीछा करना बहुत प्रिय था

पर्शियनो लोगों ने यह खेल यूनियन लोगों ने लिया और रोमन लोगों तक पहुंचा दिया यह भी पता चला है कि अमेरिका के रेड इंडियन हजारों साल तक हॉकी की किस्म का एक दमदार खेल खेलते रहे थे

किसी भी गोल चीज को स्टिक से मारने या हिट करने का बहुत आकर्षण रहा है आखिर क्रिकेट तथा गोल्फ यदि सिद्धांत के दो भिन्न रूप हैं आज जिस हॉकी  को हम देखते और खेलते हैं वह पर्शियनो यूनानीयों रोमनो तथा अमेरिकी इंडियनों की हॉकी से बहुत भिन्न है

हालांकि इंग्लैंड में हॉकी का खेल बहुत बाद में शुरू हुआ फिर भी आधुनिक हॉकी की शुरुआत पहले वहीं से हुई थी इंग्लैंड के कैटबरी‌ धर्मपीठ में एक 600 वर्ष पुराना गवाक्ष चित्र बिडो पेंटिंग)है जिसमें एक लड़के को टेढ़ी लकड़ी से गेंद को हिट करते हुए दिखाया गया है 1870 के दशक में आधुनिक हाकी को प्रचारित करने वाला लंदन पहला शहर था परंतु शीघ्र ही यह खेल मध्यवर्ती पश्चिमी,उत्तरी क्षेत्रों में फैल गया तथा 1886 में इंग्लैंड के हाकी संघ का जन्म हुआ आज भी यह संस्था इंग्लैंड में हॉकी की नियंत्रक संस्था है

पूर्व क्रिस्चियन युग में ब्रिटिश द्वीपों में गेंद और स्पीक का खेल प्रचलित था बाद में आयरलैंड में यह खेल हर्ले नाम से स्कॉटलैंड में बिट तथा इंग्लैंड और वेल्स में रेडी के नाम से जाना गया यह सभी खेल गेंद तथा आजकल की तरह की स्टिक से खेले जाने वाले मासूम होते थे

अब यह सर्व संपत्ति से माना जाता है कि हां कि जिस में आज पूर्वी देशों को मुहारत हासिल है का प्रारंभ पूर्व में ही हुए यह खेल पश्चिम में गया तो वहां के लोगों ने इसे ऐसा अपनाया कि यह वही का होकर रह गया वहीं फला फूला और परीफक्त हुआ तब से पूर्व में यह खेल का पुनर्जन्म हुआ जहां इसने कुछ अलग परंतु स्वाभाविक और शानदार प्रगति की उल्लेखनीय है कि इस परिवर्तन के बावजूद खेल की मुख्य विशेषताएं वही बनी रही 

अंग्रेजों को गर्व है कि उन्होंने इस खेल को शुरू किया और दुनिया को दिया हालांकि व्यक्ति इस विचार से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता कि हॉकी भी रोम की विधियों के साथ-साथ इंग्लैंड के लोगों को मिली बाहरहाल यह कहना न्यायोउचित होगा कि इंग्लैंड के लोग इस विचार के विरुद्ध नहीं है और वे यह सहर्ष स्वीकार करते हैं कि प्रत्येक विजय का उन पर गहरा प्रभाव पड़ा है अगर वास्तव में ऐसा है तो इसे एक रोमन उपहार मानने में उनकी अनिच्छा उचित ही है

अब यह स्पष्ट हो गया है कि हॉकी का सबसे पहला क्लब ब्लैक हिथ क्लब था जिसकी स्थापना 1840 में हुई थी प्रारंभ में यह हॉकी, फुटबॉल तथा रगबी फुटबॉल का मिला-जुला क्लब था परंतु 1852 में ब्लैक हित हॉकी क्लब के नाम से एक स्वतंत्र हॉकी क्लब का संगठन किया गया। ब्लैक हित हॉकी क्लब वाले इसी समय को अपना स्थापना वर्ष मानते हैं। अतः इसी आधार पर उन्होंने इस क्लब को शताब्दी वर्ष मनाया। यद्यपि इस शताब्दी के दौरान कुछ क्लब अवश्य रहे होंगे क्योंकि इस बात के प्रमाण मिले हैं कि उन दिनों हॉकी खेली जाती रही होगी। परंतु इंग्लैंड में इस प्रकार से जो क्लब बचे रह गए हैं उनका आरंभ 1870 से पहले का नहीं है 1871 में टैडियम क्लब की स्थापना हुई और 1876 में इसकी देख - देखी अन्य क्लब भी संगठित किए गए। हॉकी की नियंत्रण संस्थाओं में पहली संस्था की नियंत्रण संस्थाओं में पहली संस्था की स्थापना लंदन के कैनन - होटल में हॉकी क्लब की एक बैठक में की गई इस संस्था को हॉकी यूनियन के नाम से जाना जाता है।


सन् 1900 के आस - पास हॉकी नियमों के संयोजन तथा संशोधन के लिए एक राष्ट्रीय समिति की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी हॉकी संघ में आयरलैंड और वेल्स के दो - दो सदस्य सम्मिलित किए जाने के बाद एक अंतरराष्ट्रीय हॉकी समिति (बोर्ड) का निर्माण किया गया। 1902 में इसकी संख्या में 2 सदस्यों की और वृद्धि हुई। उन दोनों यह समिति ब्रिटेन समिति (बोर्ड) के नाम से जानी जाती थी।

बीसवीं सदी का प्रभाव हॉकी के इतिहास के लिए नए युग का परिचायक है तब यह खेल सारे यूरोप में बहुत ही लोकप्रिय हो चुका था और इस महाद्वीप के लगभग हर देश का एक स्वतंत्र हॉकी संघ होता था। फ्रांस, जर्मनी, हालैंड तथा डेनमार्क ने मिलकर अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ की स्थापना की, जिसका मुख्य कार्यालय पहले वियाना में था परंतु बाद में पेरिस में रखा गया जिस के साथ ब्रिटेन हॉकी (बोर्ड) के नाम से इंग्लैंड, क्लासमेंट तथा वेल्स भी संबंध थे। यह अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ हॉकी के अंतरराष्ट्रीय मैचों के नियमों का निर्माण करने के अलावा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में खेल का नियंत्रण भी करता था ओलंपिक खेलों में हॉकी प्रतियोगिता का नियंत्रण और संचालन इस अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ को इसकी स्थापना के समय से ही सौंप दिया गया था और एक पूर्ण विकसित अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ की शुरुआत हुई। 1909 के आस - पास अंतरराष्ट्रीय समिति (बोर्ड) का गठन किया गया, जिसमें ब्रिटिश प्रतिनिधियों का महत्वपूर्ण स्थान रहा।

अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ

इस संस्था का जन्म जनवरी, 1924 को हुआ जब 7 यूरोपीय देशों ने विशव भर में हॉकी के हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्था की स्थापना का निर्णय किया और इस प्रकार वे इसके संस्थापक सदस्य बन गए।

अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ अपने बहुत से उद्देश्य में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त कर चुका है अपने आदर्शों को यह पूर्ण रूप में आगे बढ़ा रहा है ओलंपिक प्रतियोगिता में हॉकी के मैचों के संयोजन करने के अलावा संघ ने पांच महाद्वीपों को एक साथ बांध दिखाया है तथा अन्य देशों में हॉकी भावना को जगाने बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है

हॉकी एक ऐसा खेल है जिसे 1924 की ओलंपिक प्रतियोगिताओं की सूची में शामिल नहीं किया गया था नव - गठित संगठन ने हॉकी को ओलंपिक कार्यक्रमों में सम्मिलित करने के बारे में प्रयत्न किए जिसके फलस्वरूप 1928 में एमस्टर्डम मैं हॉकी एक ओलंपिक प्रतियोगिता बन गई। इसका अर्थ यह था कि एक सार्थक संगठन के लिए हॉकी प्रेमी देशों की पर्याप्त संख्या तब से साधारण शुरुआत के बाद से अब तक 60 देशों और 10 लाख से भी अधिक हॉकी खिलाड़ियों ने इस संघ को दूसरे अंतरराष्ट्रीय संगठनों के समक्ष रखने में अपना सहयोग दिया है


अंतर्राष्ट्रीय महिला हॉकी संघ

महिला हॉकी टीम का पहला विदेश दौरा 1941 में आयोजित किया गया जब इंग्लैंड की महिला हॉकी टीम ने ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का भ्रमण किया परंतु जब यह टीम विजयोलास से स्वदेश लौटी तब सारा यूरोप युद्ध की विभीषिका में गिरा हुआ था। 1926 में 8 देशों के महिला हॉकी संगठनों ने मिलकर अंतर्राष्ट्रीय महिला हॉकी संघ का गठन किया

जैसे-जैसे यह खेल भारत में फैलता गया इसके लिए एक नियंत्रक संस्था की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी नवंबर 1925 को ग्वालियर में भारतीय हॉकी संघ की उद्घाटन सभा हुई जिसमें आर्मी स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड बंगाल ग्वालियर पंजाब राजपूताना दिल्ली सिंह तथा पश्चिम भारत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और यह निर्णय किया गया कि जब तक भारतीय हॉकी संघ एक प्राणवन संस्था ना बन जाए इसका मुख्य कार्यालय ग्वालियर में ही रहे।


भारतीय हॉकी संघ के गठन के बाद ग्वालियर, सिंध, पंजाब, राजपूताना, उत्तर प्रदेश, आर्मी स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड तथा दिल्ली के सर्वप्रथम उसकी सदस्यता ग्रहण की।


1929 
में रेलवे तथा पुलिस उसके सदस्य बने 1931 में बंगाल ने उसकी सदस्यता ग्रहण की और मुंबई ने सन् 1932 में। धीरे-धीरे दूसरे राज्यों को भी भारतीय हॉकी संघ का सदस्य बना लिया गया
1928 
में ओलंपिक के लिए भारतीय हॉकी टीम चुनने के उद्देश्य से पहली अंतराज्यीय हॉकी प्रतियोगिता का आयोजन प्रत्येक ओलंपिक वर्ष में किया जाता है दूसरा विश्वयुद्ध छिड़ जाने के कारण 1940 में होने वाली टोक्यो ओलंपिक प्रतियोगिताएं नहीं हो सकी थी अतः भारत में हॉकी के खेल को बनाए रखने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं हर दूसरे वर्ष में आयोजित करने का निर्णय किया गया। 1944 तक यही सिलसिला चलता रहा उसके बाद से यह प्रतियोगिता राष्ट्रीय हॉकी चैंपियनशिप प्रतियोगिता के नाम से जानी जाती है

अंतरराष्ट्रीय हॉकी संघ का उद्देश्य है कि विश्व कप हॉकी प्रतियोगिता के माध्यम से हॉकी के खिलाड़ी छोटे देशों को अपनी कला में निखार लेने का अवसर देकर विश्व भर में इस खेल को प्रोत्साहित करें और आगे बढ़ाएं परंतु इन सब से ऊपर इस प्रतियोगिता का उद्देश्य है विश्व के देशों को एक दूसरे के निकट लाना और हॉकी के भाईचारे वाले आदर्श का विश्व में प्रचार और प्रसार।

हॉकी के मापदंड

1. हॉकी का मैदान      -      लंबाई       -      91.40 मीटर (100)

                                        चौड़ाई       -     55 मीटर (60 गज)

2. 23 मीटर रेखा        -       22.90 मीटर (25 गज) प्रत्येक दिन सीमा रेखा से

3. शूटिंग सर्कल         -       14 . 63 16 गज ब्याज प्रत्येक गोलपोस्ट के आगे मध्य में पिछली 3.66 (44 गज) रेखा के समानांतर

4. टूटा हुआ सर्कल      -       शूटिंग सर्कल से 5 मीटर का व्यास

5. पैनल्टी रेखा           -       गोल लाइन के सामने 6.4 मीटर (7 गज)

6. गोल                      -       गोल पोस्ट के मध्य की चौड़ाई 3.66 मीटर (4 गज)

                                         क्रॉस बार की ऊंचाई 2-14 मीटर (7-?)

7. गोल की गहराई      -      क्रास बार के पीछे 0.90 मीटर ग्राउंड लेवल पर 1.20 मीटर पीछे

8. गोल के साइड बोर्ड   -     ऊंचाई      -       46 सेकंड मीटर      -      लंबाई 1.20 मीटर

9. गोल का बैंक बोर्ड      -    ऊंचाई       -      46 सेकंड मीटर      -      लंबाई 3.66 मीटर

10. ब्लॉग पोस्ट          -    ऊंचाई      -       1.20 मीटर से  1.50 मीटर  -  लंबाई 36 से 38

11. गेंद  भार               -    156 ग्राम से 163 ग्राम   -    ब्यास   224 मीटर से 153 मीटर

12.  खिलाड़ियों की संख्या         -        11 + 5 = 16

13.  खेल की अवधि पुरुष          -        35 -5 - 35

14.  खेल की अवधि महिलाएं     -       30 - 5  - 30

नोट - अंपायर को चाहिए कि वह देखे कि गोल पोस्ट ठीक तरह से मजबूती से जुड़े हुए हैं तथा गोल पोस्ट और क्राश बार सफेद पेंट किए गए हैं इस तरह की सावधानी से की गई देख - रेख के बिना कई बार संकटकालीन निर्णय देना कठिन हो जाता है

खेल के अत्याधुनिक साधारण नियम

1.  आपकी खेल दो दलों मैं खेला जाता है प्रत्येक दल के 11 खिलाड़ी होते हैं जिनमें एक गोलकीपर होता है तथा 5 अतिरिक्त खिलाड़ी होते हैं

2.  खेल 75 मिनट का होता है जिसमें 35 मिनट खेलने के पश्चात 5 मिनट का आराम समय होता है फिर 35 मिनट का खेल होता है

3.  5 मिनट के आराम समय के पश्चात दोनों दल अपना अपना स्थान बदल लेते हैं

4.  मैच के समय प्रत्येक दल को अपने खिलाड़ी बदलने की आज्ञा होती है तथा बदला हुआ खिलाड़ी दोबारा मैदान में आ सकता है केवल पेनल्टी कॉर्नर लगाते समय खिलाड़ी बदलने का नियम नहीं है

5.  यदि किन्ही कारणों से खिलाड़ी को निलंबित किया जाता है तो इसके बदले में दूसरा कोई खिलाड़ी उसकी जगह नहीं खेल सकता।

6.  जो खिलाड़ी अतिरिक्त समय में बदला जाता है वह दोबारा खेल में नहीं आ सकता

7.  खेल के चलते यदि गोलकीपर या दल का कोई खिलाड़ी डी में से बाल को पांव के नीचे दबा दे या पकड़ ले तो रैफरी द्वारा पेनल्टी स्ट्रोक दिया जाएगा।

8.  यदि रख सकती मंडी के अंदर कोई खतरनाक फाउल करती है तो उसके विरुद्ध पेनल्टी कॉर्नर या पेनल्टी स्ट्रोक दिया जाएगा।

9.  आक्रामक टीम को वृत्त के 5 गज के अंदर कोई भी फ्री हिट नहीं दी जाएगी।

10.  स्ट्राइक कर रही है अभी फ्री हिट या पेनल्टी कॉर्नर हिट करती बार झुक जाए तो वह दोबारा हिट कर सकता है।

11.  प्रत्येक दल का खिलाड़ी उसके संस्था द्वारा निश्चित की गई पोशाक पहने गा गोलकीपर विभिन्न रंग की पोशाक पहने गा दस्ताने बूट पेंट तथा मास्क पहन सकता है अन्य खिलाड़ी ऐसे वोट नहीं पहनेंगे जिससे दूसरों को हानि पहुंचने का खतरा हो ना ही अंगूठी या कड़ा पहन सकते हैं।

12.  अब हिट लगाते समय हाथ की कंधे से ऊपर भी उठ सकती है।

13.  विरोधी की तरफ खतरनाक तरीके से हिट करना कि करने की आज्ञा नहीं है यदि कोई खिलाड़ी ऐसा करता है तो अंपायर

(i).उसे चेतावनी दे सकता है

(ii).अस्थाई रूप से उसे बाहर निकाल सकता है

(ii).उससे शेष खेल में रोक लगा सकता है


हॉकी के मैच में निम्न अधिकारी होंगे।

टेक्निकल ऑफीसर            -           1

जज।                                 -           2

अंपायर।                            -           2

रिजर्व अंपायर                    -           1

                   हॉकी से संबंधित शब्दावली

आउटसाइड

सर्विस

शूटिंग सर्कल

इनसाइड

टाई ब्रेकर

पशु इन

कर्नर

सडन डेथ

ड्रिबलिंग

पेनल्टी स्ट्रोक

अंडर कटिंग

जैव एडलिंग

पेनल्टी कॉर्नर

सर्कल

 

फ्लिक

रोल ऑन

 

हाथी के मुख्य कौशल(Fundamental Skills of Hockey)

1.   हिट लगाने और बाल रोकना(Straight Hitting and Stopping)

(i)  रिवर्स हिट और रोकना(Reverse Push and Stopping)

(ii)  गलत पैर से हिट करना'(Pushing on the wrong foot)

2.  सीधे पशु करना और रोकना(Straight Push and Stopping)

(i)  रिवर्स पशु और रोकना(Reverse Push and Stopping)

(ii)  गलत पैर से पशु करना(Pushing on the wrong foot)

3.   स्कूप(Scoop)

(i)  पशु स्कूप(Push Scoop)

(ii) शावलिंग(Shoveling)

4.   फ्लिक(Flick)

(i)  सीधा फ्लिक(Straight Flick), रिवर्स फ्लिक(Reverse Flick)

(ii) गलत पांव पर फ्लिक(Flick on the wrong foot)

5.   ड्रिबलिंग(Dribbling)

6.   पासिंग(Passing)

(i)  थ्रो पास(Through Pass), (ii)  रिटर्न पास(Return Pass), (iii)  इंटरचेजिग पास(Interchanging Pass), (iv)  डिफ्लैक्शन पास(Deflection Pass)

7.   डाजिंग(Dodging)

(i)  दाएं से डाटिंग(Dodging to the right)

(ii)  बाय से डाजिंग(Dodging to the left)

(iii)  दोहरी डाजिंग(Double Dodging)

8.   टैकलिंग

(i)  लॉजिंग(Lauging)

(ii)  फेनटिग(Feinting)

9. खिलाड़ियों के हमले समय दौरान में स्थिति(Position play in Attack)

10. बचाव के समय स्थिति(Position play in Defence)

11. बचाव और आवश्यकता के समय साधारण कला और कौशल(Simple Strategies and tactics in attack and defence)

12. शारीरिक फिटनेस और अनुकूलन(Physical Fitness and conditioning)

13. हॉकी के नियम तथा उनकी व्याख्या(Rules of Hokey and Their Interpretation)

हॉकी के महत्वपूर्ण टूर्नामेंट(Important Tournaments of Hockey)

(1) विश्व कप महिला और पुरुष, (2) रंगास्वामी कप महिला, (3) इंदिरा गोल्ड कप, (4) फेडरेशन कप महिला, (5) एशिया कप, (6) बैटन कप, (7) जूनियर नेहरू हॉकी कप, (8) हीरो हाडा कप, (9) के डी सिंह बाबू स्मारक ट्रॉफी, (10) प्रधानमंत्री गोल्ड कप, (11) जूनियर विश्वकप, (12) यूरोपीयन चैंपियनशिप

हॉकी के महत्वपूर्ण टूर्नामेंटों के स्थान(Venues of Important Tournaments of the Hockey)

(1)  नेशनल स्टेडियम नई दिल्ली, (2) राष्ट्रीय खेल संस्थान पटियाला, (3) शिवाजी स्टेडियम नई दिल्ली, (4) स्पोर्ट्स कॉलेज बैंगलोर, कोलकाता, गांधीनगर और लखनऊ, (5) गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी अमृतसर, (6) सुरजीत हॉकी स्टेडियम जालंधर, (7) रेलवे स्टेडियम मुंबई, चंडीगढ़, ग्वालियर

हॉकी खेल में पदमश्री विजेता(Padam Shri Awardees)

(1) दादा ध्यानचंद, (2) चरणजीत सिंह, (3) के डी बाबू, (4) पृथ्वी पाल सिंह, (5) बलवीर सिंह सीनियर

राजीव गांधी खेल रतन पुरस्कार विजेता(Rajiv Gandhi Khel Ratan Awardees)

(1)   धनराज पिल्लै

द्रोणाचारिया पुरस्कार विजेता(Dronacharya Awardees)

(1)  एम के कौशिक, (2) राजेंद्र सिंह, (3) हरिद्र सिंह, (4) गुरदयाल भंगू, (5) बलदेव सिंह

हॉकी के अर्जुन अवार्ड(Arjuna Awards)

                  हॉकी के अर्जुन अवार्ड(Arjuna Awards)

ध्यानचंद

अजीत पाल सिंह

एक्टर

गुरबख्श सिंह

जगजीत सिंह

कृष्णमूर्ति

मोहब्बत शाहिद

अशोक कुमार

कीड़ा

रूपा सैनी

ई नेल्सन

प्रेम बालियां

सोमाइया

के डी बाबू

कुमारी लंबसडन

बलबीर सिंह सीनियर

हरविंदर सिंह

उधम सिंह

गुरदेव सिंह

एस पी सिंह

हरचरण सिंह

अजीत कौर

एल फर्नांडिस

बी सोनी

वासुदेवन

जय एस कारवाथू

पृथ्वी पाल सिंह

लक्ष्मण

चरणजीत सिंह

सुनीता

महेंद्र सिंह

बासकरणा

गणेश

कुमारी एल्विना

डॉ अटिला

रेखा

राजवीर कौर

गफर इकबाल

जोकिंम मार्टीन

कारवेलो

एम पी सिंह

मारवीन फर्नाडेज

मुकेश कुमार

ओमाना कुमारी

बलदेव सिंह

रमनदीप सिंह

हरपाल कौशल

बाल किशन सिंह

आर एस भोला

गगन अजीत सिंह

मिस हेलेन मैरी

सुरेंद्र कौर

प्रगट सिंह

झूठ क्लिकस

श्री आशीष कुमार बलाल

सुरजीत सिंह

मोहम्मद रियाज

बलवीर सिंह कुलार

बलजीत सिंह सैनी

जलालुद्दीन रिजवी

दिलीप कुमार टिकरी

ममता खरब

ज्योति सुनीता

इगनैस टिकरी

जगबीर सिंह

धनराज पिल्ले

प्रीतम रानी

बलजीत सिंह ढिल्लों

एम के कौशिक

बी जे फिलिप्स

टी गोरलिया शानू

मधु यादव

सीता गुसैन

दीपक ठाकुर

प्रभजोत सिंह


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